Garvdharan and Vivah Ke 14 Rochak Baatein |गर्भाधान संस्कार बारें मे जाने यह 14 रोचक बातें |

मानव समाज का पहला संस्कार गर्भाधान संस्कार हैं जो कि बिना विवाह की संभव नहि है। इसलिए पहले शादी या विवाह को बारें मे जाने यह 14 रोचक बातें (Garvdharan and Vivah Ke 14 Rochak Baatein) ।

Garvdharan and Vivah Ke 14 Rochak Baatein

1- पहले जान ते हैं विवाह का अर्थ- संसार में अनियन्त्रित हो कर घूमने वाले नारो और पुरुष कर मन को एक नियम के तहत बांधने वाला माला हि हैं विवाह (Vivah) । 

2- हमारे धर्म मे 4 आश्रम है जैसे (क) ब्रह्माचर्याश्रम, (ख) गृहस्थाश्रम, (ग) वानप्रस्थाश्रम और सन्यासाश्रम । 

3- पहले ब्रह्मचर्याश्रम मे रहते हुए पढ़ाई लिखाई करके खुद को संसार को लिए उपयोगी बनाना है । क्यूँकि किसि भी विषय पर विद्या अर्जन करने वाली व्यक्ति कुछ भी काम करने से उनको कामयाबी मिलता है।

4- लेकिन आज देखने को मिलता है कि हमारे देश तथा विदेश मे बिना पढ़ालिखा, अल्प आयु मे शादी का प्रचलन है। जिस कारण उनसे जो सन्तान पैदा होती है। वह Premature, Loss of weight, मानसिक कमजोरी, कुपोषित, अल्पायु, दिब्यांग या मानसिका विमार में पड़ने वाले होती हैं।

VIVAH KE BAARE MAIN BAATEIN

5- इसिक्रम मैं सिर्फ बच्चों को नुक्सान होता है ऐसा नहीं बल्कि माताओ को भी नुक्सान मिलता है, और बहुत सारे माताओ का मौत अकाल मैं हो जाता है

6- और एक बात विवाह तो हो गया लेकिन दंपती सन्तान चाहते है तो दोनों को शास्त्रानुसार आचरण, शारीरिक क्षमता, आयु, मानसिक, आर्थिक स्वच्छता, नियम, सयम को ध्यान मे रखते हुए कदम बढ़ाना चाहिए । नहि तो परिवार बिगड़ता है। 

7- एक उत्तम गृहस्थाश्रम सहनशीलता, और समझदारी, कार्यदक्षता, कुशलता और विश्वास तथा प्यार उभय के प्रति रहने से हि बनता है ।

8- आज सारे मानव समाज तथा विश्व में जो अराजकता, युद्ध, घृणा, भय, अशुद्धता, असमानता, ईर्षा और बहुत सारे विपत्ति हो रहा है या आना है ये सब के पिछे कहि ना कहीं बाप और मां जिमेदार है। हमारे शास्त्र में उनका बहुत प्रमाण है ।

9- शास्त्र क्या है -‘शासनात शास्त्र उच्यते’ अर्थात जो मानव समाज को शासन करता है, इसिका नाम शास्त्र है। आप भगवान को मानो या ना मानो लेकिन उस ग्रन्थ में जो नाम कहि गयी है उसको तो मानो। उधाहरण- विष को जानकर खाओ या अनजाने मे लेकिन जीब मरेगा, क्युकि वह उसका धर्म है। उसको वह छोड़ नहीं पाएगा ।

10- ग्रन्थ में जो कुछ लिखा गया है वह अनुभव के आधार पर हि लिखा गया है। हाँ इसमे कुछ अतिरक्ति कहा है लेकिन हमको मक्षी नहीं होना है, बाल्की मधुमक्षी बनकर अच्छी बातें को संग्रह करना है ।

11- हमारे सनातन धर्म मे उत्तम सन्तान के लिए उत्पादक काल (माहवारी बन्द होते के बाद 16 दिन पर्यन्त), निषिध दिन, निषिध काल, उभय मे कुछ विमारी हो तो तया उपयुक्त तिथि, नक्षत्र तथा सर्वोपरि शास्त्रानुमोदित विधि बताया गया है। जो कि विज्ञान सम्मत भी है |

12- यह भी देखने को मिलता है कि कोई अच्छा व्यक्ति का कोई बुरा कर्म करने वाला संतान उत्पन्न हो जाता है और कोई बुरा कर्म करने वाले का अच्छा संतान जन्म लेता है। शायद गर्भाधान के समय पंचांग ठिक रहा होगा या उल्टा हुआ होगा। इसलिए ऐसा हो सकता है |

GARVDHARAN

13- आज मि बहुत सारे पवित्र आत्मा अंतरिक्ष मे चकर लगा रहे हैं कि अनको कोई पवित्र माता-पिता का गर्म मिल जाए। लेकिन विडंमना है कि आज वातावरण में उनको मनचाहा गर्भ नहीं’ मिल रहा है। अच्छा दंपति आज के दुनिया मैं दुर्लभ है |

14- आज सारे विश्व में जो महापुरुष, महात्मा, सिद्धात्मा, वैज्ञानिक, राजा, समाजसेवी और अपने अपने विद्या में अपना नाम कमाया है उसके पीछे उनका पिता-माता हि उनसे महान है। जैसे माता अंजना के पुत्र महावीर बजरंगबली है ।

Conclusion

सभी आश्रम से गृहस्थ आश्रम श्रेष्ठ हे, लेकिन अच्छा गृहस्य होना कठिन है। किन्तु जो शास्त्र को पढ़ेगें उसके अनुसार आचरण करेंगे तो उन दंपति को यहाँ भी स्वर्ग का सुख मिलेगा और वह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष यह चार पुरुषार्थ को प्राप्त करेगें, और सुखी जीवन बिताएंगे | यहीं हमारा कामना है|

Aatma Kya Hai ?

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